22 जून 2021

जून 22, 2021

प्रकृति ही मालिक है

प्रकृति हीं मालिक है 

उँगली से बंधकर, कठपुतली बनकर
नाच रहे थे मालिक के इशारे पर
टूट गई डोरी, खत्म हो गया तमाशे
सन्नाटा छाया है चौराहे पर
सुनो गौर से, 
मालिक कुछ कह रहा है
नजरअंदाज किये बगैर देखो
मालिक बहुत प्रताड़ना सह रहा है
गलती कर बैठे,
संसार को किराये का घर समझने का
कुछ और बुद्धि कमाकर
सजा देते इस घर को
शायद, मालिक मोहलत देता
इस घर मे, कुछ और दिन ठहरने का
      ✍️virendra Kumar vidyarthi

प्रकृति हीं मालिक है ✍️virendra Kumar vidyarthi

प्रकृति हीं मालिक है