काश कोई चिड़ियाँ !
काश.... कोई चिड़ियाँ,
मेरे कंधे पे आकर बैठती
और मैं, चुगाता उसे दाना,
वो भर पेट खाती खाना
और मैं, सुनता उसकी मधुर गाना।
फिर उड़ जाती खतम कर के
अपने हिस्से का दाना।
मैं निहारता उसे तब तक,
जब तक वो गुम न हो जाए
आसमान में,
फिर उस दोस्त को
आवाज देता धीरे से,
और वो आकर बैठ जाती
मेरी पहचान में ।।
By:- Virendra Kumar
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| Virendra Kumar |


बहुत खूबसूरत कविता है
जवाब देंहटाएंThanks bro
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