रूढ़िता हमे भी पसंद नहीं जनाबआधुनिकता हमे भी भाती हैपर गरीबों के सीने पे नीव रखकरइमारत बनाई जाऐ,ऐसी विकास हमें रास नहीं आती है
कोई टिप्पणी नहीं:
एक टिप्पणी भेजें