पत्नी बेचारी
वो खुद का काम करती है
और आपको भी मज़ा आता है
अपना काम भी उन्ही से करवाने मे
अब ये बताओ, जब वो थक जाती है
तो क्यों शर्म करते हो उनका पैर दबाने मे
आज मै आवाहन करता हूँ
की वो जब-जब थक कर आयेगी
मै अपना कर्तव्य निभाऊँगा,
और बड़ा प्यार से अपनी पत्नी का पैर दबाउंगा
मै अपनी पत्नी का पैर दबाउंगा
बच्चे का कपड़े से लेकर मल-मुत्र साफ करती है वो
तुम बच्चे का नाक साफ करने मे घृणाते हो
मै तो सारी लोक-लज्जा छोड़ कर ,
पति धर्म निभाऊँगा ।
जब-जब सर दर्द करेगा उनका,
उन्हें आनंद की अनुभूति कराऊँगा
मै उनका सर दबाउंगा, मै उनका सर दबाउंगा
हर रोज खाना पकाती है वो
जब तबियत बिगड़ गई उनकी
तो बर्तन मांजने से शर्माते हो
ऐसी दुख की घड़ी मे मै उनका साथ निभाऊँगा
उनकी सेवा मे अपना सर्वस्व बिताऊंगा
जब-जब थक कर आयेगी
उन्हें आनंद की अनुभूति कराउँगा
और बड़े प्यार से अपनी पत्नी का पैर दवाउंगा
Virendra Kumar Vidyarthi
| पत्नी बेचारी |

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