पैसे कमाना चाहता हूँ
जुँ नहीं है बालो में, पर
पापा से पैसे मांगते बख्त
सर खुजलाना पड़ता है,
छालें पड़े हैं हाथो मे
पर अपनी बेरोजगारी के सामने
उनके दर्द को झुठलाना पड़ता है,
इन कठोर-कार्यरत हाथों को
आराम फरमाना चाहता हूँ
पैसे कमाना चाहता हूँ
मै भी पैसे कमाना चाहता हूँ,
मक्कारी-भ्रष्टाचारी के खेल में
ईमानदारी कहाँ नौकरी पायेगा,
वेतन खत्म हो गई
घुस के कर्ज चुकाने मे
लोग खुद के लिए कब कमायेगा,
मम्मी को साड़ी, और पापा के लिए
कमीज सिलवाना चाहता हूँ
पैसे कमाना चाहता हूँ
मै भी पैसे कमाना चाहता हूँ,
उम्र बढ़ती जवानी में
नौकरी मिलने की आस नहीं
बीबी हो, बच्चे हो
बहुत आनंदमयी नहीं, बस
दुखरहित परिवार बसाना चाहता हूँ
पैसे कमाना चाहता हूँ
मै भी पैसे कमाना चाहता हूँ,
याद आती है बचपन की वो आदतें
जो तैयारी के दौरान छुट गया,
कोई क्यों मुझे बताया नहीं, की
वेकेंसी का, परीक्षा-परिणाम से नाता टूट गया,
थकान सी महसूस होती है
फॉर्म भरने के पैसे मांगने मे
जींस के पिछले पैकेट मे
पर्स दबाना चाहता हूँ
पैसे कमाना चाहता हूँ
मै भी पैसे कमाना चाहता हूँ ।
पापा से पैसे मांगते बख्त
सर खुजलाना पड़ता है,
छालें पड़े हैं हाथो मे
पर अपनी बेरोजगारी के सामने
उनके दर्द को झुठलाना पड़ता है,
इन कठोर-कार्यरत हाथों को
आराम फरमाना चाहता हूँ
पैसे कमाना चाहता हूँ
मै भी पैसे कमाना चाहता हूँ,
मक्कारी-भ्रष्टाचारी के खेल में
ईमानदारी कहाँ नौकरी पायेगा,
वेतन खत्म हो गई
घुस के कर्ज चुकाने मे
लोग खुद के लिए कब कमायेगा,
मम्मी को साड़ी, और पापा के लिए
कमीज सिलवाना चाहता हूँ
पैसे कमाना चाहता हूँ
मै भी पैसे कमाना चाहता हूँ,
उम्र बढ़ती जवानी में
नौकरी मिलने की आस नहीं
बीबी हो, बच्चे हो
बहुत आनंदमयी नहीं, बस
दुखरहित परिवार बसाना चाहता हूँ
पैसे कमाना चाहता हूँ
मै भी पैसे कमाना चाहता हूँ,
याद आती है बचपन की वो आदतें
जो तैयारी के दौरान छुट गया,
कोई क्यों मुझे बताया नहीं, की
वेकेंसी का, परीक्षा-परिणाम से नाता टूट गया,
थकान सी महसूस होती है
फॉर्म भरने के पैसे मांगने मे
जींस के पिछले पैकेट मे
पर्स दबाना चाहता हूँ
पैसे कमाना चाहता हूँ
मै भी पैसे कमाना चाहता हूँ ।
✍ virendra Kumar vidyarthi
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| ✍ virendra Kumar vidyarthi |


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