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जनवरी 31, 2022
31 जनवरी 2022
hindi kavita
जनवरी 31, 2022
तुम्हें पढ़ना चाहता हूँ।
तुम्हें पढ़ना चाहता हूँ।
थोड़ा नही तुम्हें पुरा पढ़ना चाहता हूँ
जब से मिली हो रोज पढ़ता हूँ
न तुम्हारे पेज खत्म हो रहे हैं
और न खूबियाँ
आँखों के बारे मे पढ़ रहा था
लगा जैसे गहरा है समंदर से भी ज्यादा
ओष्ठ जैसे दो पंखुड़ी हो गुलाब के
और सुगंध आती है गर्दन से तुम्हारे
वक्ष, जैसे हरा-भरा बगीचा
खिला कमल के फूल है श्रोणि
मछलिदार- सा जाँघ सुनहरा लगा है
पढ़ा पैर को भी मैंने गहराई से
अब प्यार से चूमना चाहता हूँ
थोड़ा नहीं तुम्हें पुरा पढ़ना चाहता हूँ।
-- Virendra Kumar Vidyarthi
| थोड़ा नही तुम्हें पुरा पढ़ना चाहता हूँ |
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जनवरी 31, 2022
पत्नी बेचारी
पत्नी बेचारी
वो खुद का काम करती है
और आपको भी मज़ा आता है
अपना काम भी उन्ही से करवाने मे
अब ये बताओ, जब वो थक जाती है
तो क्यों शर्म करते हो उनका पैर दबाने मे
आज मै आवाहन करता हूँ
की वो जब-जब थक कर आयेगी
मै अपना कर्तव्य निभाऊँगा,
और बड़ा प्यार से अपनी पत्नी का पैर दबाउंगा
मै अपनी पत्नी का पैर दबाउंगा
बच्चे का कपड़े से लेकर मल-मुत्र साफ करती है वो
तुम बच्चे का नाक साफ करने मे घृणाते हो
मै तो सारी लोक-लज्जा छोड़ कर ,
पति धर्म निभाऊँगा ।
जब-जब सर दर्द करेगा उनका,
उन्हें आनंद की अनुभूति कराऊँगा
मै उनका सर दबाउंगा, मै उनका सर दबाउंगा
हर रोज खाना पकाती है वो
जब तबियत बिगड़ गई उनकी
तो बर्तन मांजने से शर्माते हो
ऐसी दुख की घड़ी मे मै उनका साथ निभाऊँगा
उनकी सेवा मे अपना सर्वस्व बिताऊंगा
जब-जब थक कर आयेगी
उन्हें आनंद की अनुभूति कराउँगा
और बड़े प्यार से अपनी पत्नी का पैर दवाउंगा
Virendra Kumar Vidyarthi
| पत्नी बेचारी |
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